Tuesday, July 5, 2011

बलात्कार! बलात्कार!! बलात्कार!!!

लखनऊ। महिलाओं की आबरू लुट रही है। उनकी हत्याएं हो रही है। आंख फोड़ने से हाथ काट लेने जैसी क्रूर घटनाएं बढ़ रही हैं। सियासी दल लुटी-पिटी औरत पर राजनैतिक तमाशे खड़े करके बेशर्मों की तरह अपने वोट बैंक में नए खाते खुलवाने के प्रयास में लगे हैं। सरकार और उसकी पुलिस गैरजिम्मेदार बयानों के जरिए प्रदेशवासियों को बहलाने और अपने इकबाल का झांडा बुलंद करने को तरजीह दे रहे हैं।
            लखीमपुर खीरी के निद्यासन में सोनम, कन्नौज, गुरसहायगंज के गड़वाबुजुर्ग गांव की किशोरी, बाराबंकी में 6 साल की बच्ची सविता के साथ जो दरिंदगी हुई हैं, उसमें पुलिसवालों की भूमिका बेहद घिनौनी और अपराधियों जैसी है। मुख्यमंत्री ने भले ही उन्हें सजा के तौर पर निलम्बित कर दिया व एक सिपाही को जेल भेज दिया, लेकिन लखनऊ में बैठे कानून-व्यवस्था सम्भालने के जिम्मेदार मुखिया के बयान जहां झूठ से लबरेज हैं, वहीं बेहद गैरजिम्मेदाराना। शायद इसीलिए विपक्ष उन पर बसपा कार्यकर्ता होने का आरोप लगाता है।
            यहां एक बात कहनी आवश्यक होगी कि बसपा के एक दिग्गज नेता जो दो बार चुनाव हार चुके हैं कहते हैं कि  बेशक अपराधी सरकार से पूछकर बलात्कार नहीं कर रहे हैं, इसलिए विपक्ष, मीडिया दोनों की उतनी ही जिम्मेदारी बनती हैं। जितनी सरकार की, बेशक पुलिस बिगड़ैल है, उसका आचरण अपराधियों जैसा है, लेकिन इसमें भी हमारी सामाजिक परिस्थितियां और उसके पर्यावरण में हो रहे असंतुलन की जिम्मेदारी भी है। बलात्कार मानसिक रोग है, सामाजिक अपराध है इससे निबटने के लिए हर किसी को आगे आना होगा।
            बांदा के शीलू बलात्कार कांड में पुलिस लगातार तरह-तरह के तमाशे खड़े करके पीड़िता व उसके परिवार को प्रताड़ित करने में लगी है। ऐसे ही समूचे सूबे में दलितों पर बर्बर जुल्म हो रहे हैं। गोण्डा तरबगंज के सेमरा ग्राम के दलित प्रधान लाटूराम को दबंग आठ महीने तक बंदी बनाए रहे। उसकी पत्नी की गुहार किसी ने नहीं सुनी। राजद्दानी के बख्शी का तालाब क्षेत्र में दलित मुन्नी की पिटाई कर उसका हाथ तोड़ दिया गया, शिकायत करने पर पुलिस ने पीड़िता के पति को ही हवालात में डाल दिया। यह सब अचानक नहीं है। इसकी ईमानदारी से जांच की जानी चाहिए। यह चुनावी वर्ष है आरोप-प्रत्यारोप के जरिए वोट की राजनीति से अलग हटकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर सभी आयोगों व उच्चस्तरीय सरकारी मशीनरी के साथ ‘सिविल सोसायटी’ को आगे आना होगा।
बलात्कार की हालिया प्रमुख घटनाएं
ऽ          6 साल की सविता फतेहपुर से गायब हुई। 11 जून को शव बाराबंकी में मिला। एक आंख व किडनी गायब। नरबलि की आशंका। सविता के चाचा व एक कथित तांत्रिक को पकड़ा।
ऽ          फिरोजाबाद के सिरसागंज में 20 जून की रात पंद्रह वर्षीय किशोरी को शानू और गटुआ ने बहाने से बारात घर में बुलाकर रेप किया और भाग निकले। शानू गिरफ्तार, लेेकिन गटुआ फरार।
ऽ          एटा में 19/20 जून की रात सुनील, सुमन और मुलायम सिंह ने अनारकली के घर में घुस कर दुराचार किया व जिंदा जला दिया। अभियुक्त फरार, एसओ निधौली कला निलंबित।
ऽ          गोंडा में 19 जून की रात दुराचार के बाद कत्ल की गई नाबालिग बच्ची की लाश बरामद की गई। पुलिस ने हालांकि दो आरोपियों गोविंद और ननके को गिरफ्तार किया है।
ऽ          कानपुर में भी बीस वर्षीय युवती को कुछ लड़के रावतपुर रेलवे स्टेशन से नशीली दवा खिलाकर एक होटल में ले गए। वहां सामूहिक दुराचार किया गया। स्पेशल डीजी बृजलाल ने कहा कि युवती अपनी मर्जी से गई थी। उससे दुराचार नहीं हुआ।
ऽ          बागपत के ढिकौली गांव में 14 वर्षीय किशोरी से सुनील, राजीव और मनोज द्वारा दुराचार का आरोप है। पुलिस ने सिर्फ मनोज को गिरफ्तार किया है। पुलिस इस घटना को छिपाए रही और आरोपी किशोरी के परिजनों को लगातार द्दमकियां देते रहे। अंततः उन्होंने पैरवी करने वाले चाचा सत्यपाल (40) की गोली मारकर हत्या कर दी।
ऽ          फर्रूखाबाद में युवती से सरेराह दुराचार का प्रयास किया गया। हमलावरों ने विरोध करने पर उसे गोली मार दी। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने एक हमलावार को भी पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई शुरू की है।
ऽ          झांसी के बबीना थाना क्षेत्र के ग्राम कोटी में दयानन्द के घर विवाह समारोह में आई नाबालिग स्वाती के साथ दो युवकों ने बलात्कार किया। एक गिरफ्तार।
ऽ          अलीगढ़ में पुलिस हिरासत में 20 जून को पुनेथी पुलिस चौकी में सिपाही व उसके एक साथी ने पूछताछ के दौरान बलात्कार किया। पुलिस कप्तान ने जांच के आदेश दिये।
ऽ          फतेहपुर में 20 जून को एक 12 साल की किशोरी के साथ दो लोगों ने बलात्कार किया। पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
ऽ          बागपत में सीआरपीएफ जवान की 17 साल की बेटी के साथ उसकी सहेली के दो भाईयों ने बलात्कार किया। शर्मिन्दगी के कारण लड़की ने आत्महत्या कर ली।
ऽ          मुजफ्फरनगर के पास हाईवे के एक पेट्रोल पंप पर देहरादून से आ रही दिल्ली की दो युवतियों के बसपा विधायक के समर्थकों द्वारा मारपीट, लूट व बलात्कार का प्रयास।
ऽ          मऊ में एक महिला ने दो पुलिसवालों, बस के कंडक्टर व उसके मालिक पर सामुहिक बलात्कार का आरोप लगाया हैं जांच के आदेश जारी।
ऽ          बाराबंकी जनपद के देवां कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत इब्राहिमाबाद में 24 जून की रात 8 बजे राजाराम की बेटी कक्षा तीन में पढ़ने वाली अंजलि से गांव के युवक शिवकुमार ने मुंहकाला किया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज, घायल बालिका लखनऊ के अस्पताल में भर्ती।
ऽ          लखीमपुर के धौरहरा थानाक्षेत्र के सैनीपुरा गांव में 24 जून की रात कमांध रामसनेही ने रमेश घर में घुसकर मां के साथ सोई पांच साल की बच्ची से दुराचार कर डाला। युवक गिरफ्तार।
ऽ          सुल्तानपुर में दोस्तपुर थानाक्षेत्र के तेदुआकाजी गांव की छः वर्षीय बच्ची के साथ 24 जून की शाम शौच जाते समय मुकेश विश्वकर्मा ने दुराचार किया, एसपी के हस्तक्षेप व मेडिकल के बाद पुलिस ने रिपोर्ट लिखी।
ऽ          प्रतापगढ़ के महेशगंज थाना क्षेत्र के ठकुराइन के पुरवा मजरे पटना गांव की 29 साला दलित युवती के साथ 22/23 जून की रात घर में घुसकर जबरन दुष्कर्म किया। पुलिस ने पीड़िता को थाने से भगाया। एसपी के हस्तक्षेप के बाद आरोपी गिरफ्तार व एसओ/एसआई निलंबित।
ऽ          बरसाना के गांव जिरावली में गांव के ही पप्पू ने 18 वर्षीय युवती से बलात्कार में असफल रहने पर उसे जहर पिला दिया। बिजनौर में भी युवती से बलात्कार में असफल युवक ने युवती को पीटा।
ऽ          घटनाएं और भी हैं, जो दर्ज नहीं हो सकीं।

किराए पर दो घंटे का सेक्स...

लखनऊ। हादसे होते हैं, तो खबरे छपती हैं। लोग पढ़ते है, भूल जाते हैं। पिछले साल अप्रैल में इंदिरा नगर के कल्याण अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल  से आलमबाग की रहने वाली पूनम तिवारी को फंेक दिया गया था, मौके पर ही इसकी मौत हो गई थी। पूनम अपने धर से रोज 10 बजे ब्यूटी पार्लर में नौकरी के लिए निकल जाती थी। हादसे के बाद पूनम ने घरवालों को जिस ब्यूटी पार्लर में नौकरी करना बताया था, वह पुलिस को ढूंढे नहीं मिला। पुलिस पहले एक शांपिंग माल में स्थित ब्यूटी पॉर्लर में गई, फिर उसने लीला सिनेमा हाल के पास तीन-चार ब्यूटी पॉर्लर में पता किया लेकिन किसी ने पूनम के अपने यहां काम करने की पुष्टि नहीं की।
            इस घटना के आरोपी पकड़े गए। पुलिस ने मसाज पार्लरों पर डण्डा चलाया। फिर सब कुछ सामान्य। पूनम को शारीरिक सम्बन्ध न बनाने के चलते फंेका गया, बताया गया।
            ऐसी ही एक घटना पिछले साल मई में गोमतीनगर के फन रिपब्लिक मॉल में घटी थी। मेरठ से आई यहां बीबीड़ी में पढ़ रही श्रुति अग्रवाल अपने दोस्त इन्दौर के राजकुमार से रूठी और चौथी मंजिल से कूद गई। दूसरी घटना इसी साल के शुरू में कानपुर में ब्याही शांति आलमबाग के एक मॉल से कूद गई। दोनो युवतियों की मौत मौके पर हो गई।
            ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली पूनम को अपने जाल में मोनू ने फैसाया और फिर मसाज पार्लर के नाम पर दूसरा धंधा शुरू करा दिया अक्सर कई लड़कियां बिना कुछ सोचें समझे, कहीं भी काम करना शुरू कर देती हैं। अखबारों में अक्सर इस तरह के विज्ञापन निकलते ही युवतियां आवेदन करने पहुंच जाती हैं। कोई चार साल पहले हजरतगंज में अशोक मार्ग स्थित एक ब्यूटी एंड मसाज पार्लर में ऐसा ही गोरखधंधा पकड़ा गया था। तब खुलासा हुआ था कि इस पार्लर में एक दर्जन युवतियाँ नौकरी कर रही है।
            इससे अलग एक घटना पिछले दिनांे अखबारों में छपी थी। एक युवक जिस मकान में किराये पर रहता था उसकी मकान मालकिन उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाती थी। कुछ दिनों बाद अपनी सहेलियों से भी संबंध बनाने को मजबूर करने लगी। युवक परेशान होकर पुलिस की शरण में गया, तब उसकी जान बची। पुलिस भी दैहिक शोषण में शामिल रहती है। दो महीने पहले पीटीएस मेरठ में महिला रंगरूटों से अश्लील डांस जबरिया कराये जाने का खुलासा हुआ था। यह नाच-गाना एक डीआईजी साहब के स्वागत में हुआ था। इसी तरह एक दरोगा जी अपने इलाके के ब्यूटी पार्लरी से ‘हफ्ता’ न लेकर अपना ‘फुल बॉडी मसाज’ कराते थे। इसकी जानकारी एक पत्रकार को हो गई तब जाकर उस महिला की जान छूटी।
            कुल मिलाकर देह व्यापार के नए चलन ने नवाबी शहर का मिजाज बिगाड़ दिया है। कभी लखनऊ में चकलाघरों के नाम पर नक्खास अकबरी गेट का इलाका जाना जाता था। आज पूरे शहर में नई शक्लें अख्तियार कर फैल गया है। इससे निजात पाने के लिए कानून पुलिस, सरकार के इकबाल से अधिक सामाजिक सरोकारों पर नए सिरे से सोंचने की जरूरत है। रिश्तों पर नई सोंच के साथ औरत-मर्द सेक्स को इंज्वाय समझने की जगह अपने अस्तित्व को पहचान कर उससे जुड़े संस्कारों को अपनाएं तभी बदलाव संभव होगा।

रोटी के रूठने का आतंकवाद अक्षरों के जेहाद से हार गया

साठ में दो और जुड़ गये। गोया बांसठ का हो गया। चुनांचे जिंदगी के 22630 दिन गुजर गये। इनको पलटने का अपना अलग आनन्द है, साथ में सठियाने का हलफनामा भी। सच कहूं तो आसमान पर छाये काले बादलों के जार-जार आंसुओं से भीगी-बौराई नदियों के शोर के बीच दुनिया में मेरी आमद मेरी अम्मा को कितनी नागवार लगी होगी। घर के आंगन से धुंआ भी न उठा होगा। अषाढ़ का महीना। भर बरसात के दिन-रात। न कोई गोला दगा, न किसी ने शंख फूंका होगा। यह लंतरानी यूं ही नहीं है। महज साल भर बाद अम्मा को चिता की गीली लकड़ियों के बीच सुलगना पड़ा। तब भी अषाढ़ का महीना था। बरसात की गरज-तरज जारी थी। 7 जुलाई जब भी आती है, मेरी आत्मा बेचैन हो जाती है। अम्मा के लिए नहीं, उनकी पीड़ा भरी नाराजगी की कल्पना के लिए। तस्वीरों में मौजूद उनके चेहरे के भाव मेरी समझ में आज तक नहीं आये। घर में टंगे तमाम कलेंडरों में, रसोईघर की अलमारी के मन्दिर में मां दुर्गा की तस्वीरों के भाव भी नहीं समझ पाया। साफ कहूं तो माता के अभाव और बचपन के भयावह गलियारों की धूल ने एक जिद भी पैदा की। उसकी गवाही में किसी की दो लाइनें हैं, ‘टूटी हुई मंुडेर पर छोटा-सा एक चिराग/मौसम से कह रहा है, आंधी चला के देख’। बस ऐसी ही जिद ने संघर्ष को संकल्प में बदल दिया। रोटी के रूठने का आतंकवाद अक्षरों के जेहाद से हार गया। ‘न द्दनं न जनं न च सुन्दरीं कवितां वा जगदीश कमाये।’ इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं से परे माता सरस्वती के मन्दिर में उपासनारत हो गया।
            62 बरस बीत गये। सशररी अम्मा यशोदा की शक्ल में भी भले ही नहीं मिलीं, लेकिन संगिनी, बिटिया और बहुओं की शक्ल में जो दिखा, मिला शायद मातृत्व का मंगल ही होगा। तभी तो इन सबों को मेरा जन्मदिन भरअंजुरी याद रहता हैं। जब साठ का हुआ तो दोस्तों के साथ जन्मदिन का आनंद पहली बार लिया। अब हर बरस नाती-नतिनी, पोता-पोती दुलराते हैं, 7 जुलाई।
            अषाढ़ में ही गुरू पूर्णिमा पर्व होता है। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’, गुरू ने ही रौशनी दिखाई। ‘नवजीवन’ से ‘प्रियंका’ तक की यात्रा में गुरू बृहस्पति की तरह संग रहे और आज भी हैं। गुरूकृपा से ही ‘प्रियंका’ बत्तीस बरसों से बराबर हिन्दी के पाठकों की दुलारी है। दरअसल उन्होंने मेरे हाथों में जो कलम थमाई थी, वह आज भी आदमी की आपदा के समय विस्फोट पैदा करने वाले शब्दों की जननी है। गुरू का आशीष उम्र के उस मोड़ पर मिला जब संघर्ष की कोखजायी पीड़ा वेश्या बनने को आतुर थी। पीड़ा के कौमार्य को सहेजना आसान नहीं होता। गुरूवर ने पीड़ा को अंकशयनी बनाने का गुर दिया। फिर क्या मजाल जो जिंदगी की सड़क पर उदासी की गश्त लग पाती। अखबार के दफ्तरों को बदलने के साथ कई खौफ, कई जीवट टकराये, विस्फोट हुए फिर सब शान्त। यहीं है गुरूकृपा। गुरूवर को शत्-शत् प्रणाम।
            संघर्ष को न किसी कुरूक्षेत्र की आवश्यकता होती है न ही किसी अर्जुन की, हर क्षण ‘द्रौपदी’ से बलात्कार के प्रयास होते हैं। बस यहीं ‘प्रियंका’ का जन्म होता है। भले ही व्यवस्था या उसके भ्रष्ट सहोदर उसे ‘चीथड़ा’ मानते रहें। जब तीसों दिन हत्याओं और औरतों की आबरू लुटने का सिलसिला जारी रहे, पुलिस के पहरे में जिन्दा आदमी लाश में बदल जाये, हर आवाज को सरकारी लाठिया लहूलुहान कर दें और राजसिंहासन अहंकार के मद में मानवीय शिष्टाचार तक को विद्युत शवदाह घर का रास्ता दिखा दे, तब ‘चीथड़े’ ही मानवता का तन ढकने के काम आते हैं। ‘प्रियंका’ के साथ इसी धर्म को निबाहना ही संघर्ष है।
            जन्मदिन पर बधाई देना औपचारिक हो सकता है, लेकिन अपने जन्मदिन पर अपनी ही पीठ ठोंकना, अपनी तमाम नाकामियों और लाचारियों पर हंसकर अपने को ताकतवर बनाना है। कुछ ऐसा ही यजुर्वेद में भी पढ़ा था, ‘हे मानव, स्वयं अपने शरीर को समर्थ कर, स्वयं सफल कर, स्वयं यज्ञकर, तेरा महत्व किसी दूसरे से प्राप्त नहीं किया जा सकता। ‘यह सच है कि जन्म देने वाली मां और माता दुर्गा दोनों ही मेरे सामने तस्वीरों वाली मां की शक्ल में हैं। ये तस्वीरें मेरी ऊर्जा बनती रहीं हैं। मेरी पत्नी बताती हैं कि इस उम्र में भी रात को सोते समय मैं कभी-कभी दूध पीने जैसी आवाजें निकाल बैठता हूँ। कभी किसी आत्मीय से बातें करने, झगड़ने जैसी आवाजें निकालता हूँ। शायद माता स्वप्न में ही आशीषती होंगी। जो भी हो 62 की उम्र में शायद असुविधाओं और अज्ञानता के बादल गहरा जाते हैं, तब अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। मां सिर्फ मां होती है, तस्वीर वाली मां को प्रणाम!

चलती क्या...

लखनऊ। राजधानी होने के नाते शहर 20-22 घंटे जागता है। भागता हैं जगमगाता है। सौंदर्यबोध भी कराता है। कुछ इस तरह कि सारे संस्कार, सारी मान्यताएं और शर्म नंगे हो जाएं। जी हां, चारो ओर भागते-दौड़ते ट्रैफिक के बीच और बंद कमरों की खिड़कियों से आती कामुकता भरी गर्म सिसकारियाँ मनुष्य के सेक्स सर्कस की दिलचस्प कथाएं बयान करती है।
            पहली कथा, आलमबाग टैक्सी स्टैंड से हजरतगंज के लिए रोज एक लड़की सुबह दस बजे आती है। आते-जाते वो एक खास थ्री व्हीलर पर ही देखी जाती। उस ऑटों चालक से उसकी दोस्ती बढ़ती जाती। लड़की पढ़ी-लिखी थी, एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करती। ऑटो चलाने वाला लड़का उम्र में उससे छोटा व अनपढ़ फिर भी उन दोनों में सिनेमाई प्रेम पनपने लगा। लड़की के लिए ऑटो चालक शाहरूख खान, लड़के के लिए वो ‘बिप्स’। इस बीच सपने, सिनेमा, मॉल से लेकर देह के उपकरणों की नुमाइश से कसमसाते लड़के ने शहर से पच्चीस किलोमीटर दूर नए बने एक गेस्ट हाउस में अपने एक मित्र व उसकी प्रेमिका के साथ अपनी प्रेमिका के लिए भी दो कमरे बुक करा लिए। प्रोग्राम बना, सब उस सूनसान जगह पहुंचे। लड़की थोड़ा घबराई। लड़के ने प्यार से उसे बांहों में समेट लिया। कमरे में पहुंचते ही। लड़का ‘पोर्न हीरो’ बनने को बेचैन, लड़की विचलित। मित्र और उसकी प्रेमिका बोल,े तुम्हारी पूजा करने के लिए तो यहां आएं नहीं है। इंज्वाय करो-कराओ। फिर भी लड़की में झिझक जारी। मित्र बोला, भाई तुम तो अगरबत्ती जलाकर इनकी पूजा करो मैं तो अपने कमरे में चला। उसके जाते ही लड़के ने दरवाजा बंद किया और जब तक लड़की कुछ समझती तब तक वह बन गया ‘पोर्न हीरो’। लड़की के साथ एक झटके में वह सब घट गया जो उसने सोचा भी नहीं था। इसके बाद जो धटा वह उसके लिए और हौलनाक था।
मित्रों ने अपनी प्रेमिकाएं बदल ली। लड़की को इस हादसे ने देह व्यापार के बाजार में खड़ा कर दिया।
            दूसरी कथा, शहर की पॉश कॉलोनी मंे किराये के फ्लैट में शर्मीली और उसके पति रहते हैं। उनके यहां मित्रों की आमदा रफ्त से अगल-बगल के लोग परेशान रहते हैं। दरअसल युवक शर्मीली का किराये का पति हैं। दोनों में समझौता है।
            तीसरी कथा, चारबाग के दड़बेनुमा एक लॉज में केवल दस छोटे कमरे है। ये कमरे चौबीसों घंटे फुल रहते हैं। दिन में घंटे-दो घंटों के लिए जवान जोड़े आते, ठहरते मौज मनाते हैं, चले जाते हैं। इनमें अधिकतर स्कूली युवा होते हैं।
चौथी कथा, सफदरबाग घनी बस्ती। यहां मध्यमवर्गीय परिवार रहते हैं। एक खाली मकान में आये दिन युवा जोड़े दिन में आते हैं। दरवाजा बंद, अंदर मौज होती शाम तक सन्नाटा हो जाता।
            इन कथाओं का सच है देह व्यापार। शहर के हर ऑटो, बस स्टैंड में मुंह ढके लड़कियों को देखा जा सकता है। इनमें यार, साले से लेकर उम्दा किस्म की वजनदार गालियों का इस्तेमाल आमतौर पर होता देखा जा सकता है। ये युवा ‘वेज-नानवेज जोक्स’ सुनते-सुनाते और बंटी-बबली जैसी हरकतें करते देखे जाते हैं। इनकी मौज के खर्चे भी बड़े कीमती हैं। जिसके चलते इनके कारनामें भी हैरतअंग्रेज हैं।