Wednesday, May 10, 2017

छत पे बंदर दुवारे पे कूकुर.....हाय राम !            प्रियंका संवाददाता
लखनऊ | बंदरों की शोहदई , कुत्तों की गुंडई और सांडों की दबंगई से अकेले राजधानी नहीं पूरा सूबा हलकान है | हर दिन इनके आतंक की नई नई खबरें दहलाने को काफी होती हैं , हुसैनगंज में बढीया मोहल्ले के ५० साला रामपाल को बंदरों के झुंड ने छत पर दौड़ा लिया जिससे वे तीन मंजिल से नीचे गिर पड़े और अस्पताल में उनकी मौत हो गई , दो साल पहले ठीक इसी तरह बंदरों ने उसी छत पर उनके भाई पर भी हमला किया था और वे भी   छत से नीचे गिर गये थे व उनकी भी मौत हो गई थी | अलीगंज में छत पर खेल रही ६ साल की बच्ची को दौड़ा कर लहूलुहान किया तो राजाजीपुरम में आदित्य को काट लिया , आलमबाग से अमीनाबाद व पुराने लखनऊ के पतंगबाज बच्चे अकेले छत पर पतंग उड़ाने से डरते हैं | महिलाएं भी अकेले छत पर जाने से डरती हैं | कई जगहों से खबरें आई हैं जहां बंदरों ने महिलाओं के साथ बेहूदगी भरी अश्लीलता की और बर्बरता पूर्वक उन्हें लहूलुहान किया | और तो और रसोई में घुस कर वे उनके हाथ तक से सामान छीन ले जाते हैं | छतों पर लगी पानी की टंकियों में घुस कर नहाते हैं उसी में मल-मूत्र कर जाते हैं जिससे खतरनाक बीमारियां फैलती हैं , पानी के लिए लड़ते झगड़ते पाइप लाइन तोड़ देते हैं | हाल ही में  शाहजहांपुर कचेहरी में बंदरों ने ठंढे पानी की मशीन के पाइप को तोड़ डाला जिससे पूरी कचेहरी ८०० वकीलों , वादकारियों , हवालाती कैदियों व उनके मुलाकातियों समेत हजारों लोग पांच दिन प्यास से हलकान रहे | वहां लगे सरकारी नल भी खराब थे |
बंदरों की शोहदई की तमाम खबरें समय समय पर छपती रहीं हैं , लडकियों के छात्रावासों में घुस कर उनके कपड़े फाड़ने , उन्हें काटने व सरेराह युवतियों को परेशान करने के साथ उनसे शिष्ट व्यवहार करते भी देखा गया है | बतादें कि स्विट्जरलैंड में न्यूचाटेल विश्वविद्यालय की की बायोलाजिकल टीम ने साउथ अफ्रीका के लोस्कोप बांध नेचर रिजर्व में जंगली वेर्वेट प्रजाति के बंदरों के समूहों के अध्ययन के दौरान पाया की ये बंदर महिलाओं के प्रति आकर्षित होते हैं | यदि कोई महिला प्रेरित करे तो उसे ये बेहतर ढंग से समझते हैं , इस निष्कर्ष को शोध पत्रिका की रायल सोसायटी व में छापा गया है | ऐसा ही एक शोध कुत्तों के बारे में भी छप चुका है और उनके महिलाओं के प्रति आकर्षित होने व शोहदई के सैकड़ों वीडियो नेट पर देके जा सकते हैं | बंदर और कुत्ते सरेआम संभोगरत व संभोग के लिए झगड़ते देखे जा सकते हैं | मजे की बात है विधानसभा चुनावों के दौरान रोडशो के बीच हारे-जीते नेताओं का आमना-सामना दोनों से हो चुका है लेकिन ‘एंटी रोमियो स्क्वायड ‘ गठित करने वालों ने इन आतंकी शोहदों की ओर ध्यान नहीं दिया ?
राजधानी लखनऊ में आवारा कुत्तों की संख्या से नगर निगम अंजान है और एबीसी सेंटर महज कागजों पर चल रहा है , उसके आलावा पालतू कुत्तों पर भी नगर निगम मेहरबान है जबकि उसके लाइसेंस वही बनता है ? मजेदार बात है स्वछता अभियान का हल्ला ‘ जहाँ सोंच वहां शौचालय ‘ गजब है ,हर कोई फोटो खिंचा रहा है , यही बेशर्म सेमिनारों में प्रदूषण , पर्यावरण असंतुलन पर बड़ी-बड़ी बातें बघारते हैं और हर सुबह-शाम अपने प्यारे ‘पपी’ राजपथ  जनपथ से लेकर गली-मोहल्लों , कालोनियों व पार्कों में टहलाते उन्हें मल-मूत्र त्याग कराते देकें जा सकते हैं | ये बेगैरत आपके मकान के गेट के सामने , बीच रस्ते में , कार-स्कूटर के आस-पास या ऐसे ही सार्वजनिक स्थलों पर जानबूझ कर कुत्तों से मल-मूत्र त्याग करवाते हैं | यदि आप मना करें तो रसूख के रौब के साथ झगड़ पड़ते हैं या बेचारगी से ‘ फिर कहाँ ले जाएं ‘ सवाल दाग देते हैं | इन काले साहबों ने ललमुहें साहबों की नकल कर ‘डागी’ पालना सीख लिया लेकिन उनकी तरह अपने पपी के मल को कूड़ाघर में फेकने या फिकवाने की आदत नहीं सीखी ? वहीं इन पालतूओं के साथ आवारा कुत्तों का मल-मूत्र चारो ओर गन्दगी के साथ वैक्टीरिया फैला कर तमाम जटिल बीमारियों को जन्म दे रहा है | बताते चलें कि कुत्ते के एक ग्राम मल में दो करोड़ से अधिक इ.कोली सेल होते हैं और लाखों कुत्तों का मल-मूत्र जमीन को दूषित कर भूजल के जरिये व वातावरण में उससे पैदा होने वाले कार्बन के जरिये गंभीर बीमारियां फैला रहा है | ठीक यही हाल बंदरों के मल-मूत्र का भी है | उसके आलावा इनके काटने पर एंटी रैबीज टीका लगवाना पड़ता है जो आसानी से सरकारी अस्पतालों में मिलता नहीं |

कुत्ते , बंदरों के पकड़ने के नाम पर बजट तो डकार लिया जाता है लेकिन कोई कारगर कार्रवाई कभी नहीं होती और जिस कान्हा उपवन को लेकर पूर्व मेयर से लेकर नगर आयुक्त , सभासद अपनी पीठ ठोंकते नहीं अघाते हैं उसे तो मुलायम सिंह यादव के  छोटे बेटे- बहू को दहेज में दिया जा चुका है और नये मुख्यमंत्री भी बहूरानी की गौशाला जाकर उस पर मुहर लगा चुके हैं ? दूसरी ओर दिल्ली सरकार के मंत्री अनिल माधव दवे ने चार महीने पहले प्रेस से कुत्तों की फ़ोर्स बनाने की बात कही थी ,इनके प्रशिक्षण के लिए बाकायदा डॉग यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव भी दिया था | इन्हें वाचडॉग बनाया जाएगा जो गली-मोहल्लों की सुरक्षा के साथ आतंकवाद से निपटने में भी मदद करेंगे | इस पर उन्होंने सुझाव मांगने के साथ कुत्तों के प्रजनन के लिए दिशा निर्देश भी जारी किये हैं ,उनके मुताबिक महाभारत काल से मनुष्य का सबसे वफादार साथी रहा है कुत्ता फिर भी इसके बारे में किसी ने नहीं सोंचा | बेशक कुत्तों व बंदरों के साथ अन्य जानवरों के साथ क्रूर व्यवहार होता है उसे भी रोकना होगा , लेकिन ‘छत पे बंदर दुवारे पे कुत्ता कैसे बाहर जाई....या हाय राम...’ संकट से निपटने के लिए एनिमल वेलफेयर बोर्ड बनाने के साथ यूपी को रैबीज फ्री बनाने का काम गम्भीरता से होगा ? वह भी तब जब सूबे के अस्पतालों में इंसानों को ‘बाडी’ में तब्दील किया जा रहा हो ? 
वेटिंग रूम    लघु कथा     राम वरमा
बरेली आते ही जहां वातानुकूलित बोगी में जीवित होने के कई सुबूत एक साथ हलचल मचाने लगे , वहीं मेरे जेहन में गूंजने लगा ‘ बन्नो तेरी अंखियां सुरमेदानी.....’, यानी आँखों के सुरमे वाला शहर, यहीं कहीं बाजार में किसी गोरी का झुमका कभी गिरा था | इन सबसे अलग आलाहजरत का मुकाम और पागलों का मशहूर अस्पताल गोया इन खूबियों के साथ गुजरात के गांधीधाम से बरेली तक थका देने वाली बेहद उबाऊ यात्रा के बाद अपने उत्तर प्रदेश के बड़े से स्टेशन बरेली पर दो घंटे का छोटा सा विराम सुखकारक लगा | बोगी से उतरते ही कुली के साथ पत्नी सहित वातानुकूलित प्रतीक्षालय पहुंचा , जो मरम्मत कार्य के कारण बंद था | कुली की सलाह और पत्नी के इशारे पर दूसरे दर्जे के प्रतीक्षालय आ पहुंचा , कुली ने एक कोने में पड़ी बड़ी सी लकड़ी की कुर्सी के पास सामान जमा दिया और गाड़ी के समय पर आने को बोल कर चला गया | उसके जाते ही एक व्हील चेयर पर छोटे से बगैर हाथ पैर वाले विकलांग को एक कुली लाकर एक कोने में खड़ा कर जाने लगा तभी वो विकलांग जोर से चीखा , ‘समय पर आ जइयो नहीं तो पैसे नहीं दूंगा |‘ कुली बोला,’ चुपचाप यहीं बैठे रहना , गाड़ी आने पर बिठा दूंगा |’ ‘हाँ...वही कह रहा हूं , तुम सब हराम की ढूढ़ते हो मेरे पास मुफ्त का मॉल नहीं है |’
‘अरे बाबा चुप कर आ जाऊंगा |’ कुली झल्ला कर बोला | ‘ मैं भी तो ........! ‘ .कुली उसकी पूरी बात सुने बगैर बाहर निकल गया |’
‘क्या जमाना आ गया पैसा भी लेगा काम भी नहीं करेगा अब इसको क्या बोलूँ जब अपने सगे वाले ही ठेंगा दिखाते हैं ....आह ..मेरे को इसीलिए शादी करनी पड़ रही है कम से कम बीबी मेरे सारे काम तो कर देगी | कौन किसका भाई , कौन किसकी भौजाई ? सब पैसे के यार | भला हो नारायण स्वामी का....उन्होंने मेरी शादी का इंतजाम कर दिया तभी तो गुजरात नारायण स्वामी मंदिर जा रहा हूं , वहां अगले हफ्ते मेरी शादी होनी है |’ 
‘पर बीबी को खिलाओगे क्या ?’ किसी यात्री ने पूँछ लिया |

‘मेरे पास बहुत जायजाद है , पैसा है सब....भाई भतीजे हड़प जाने की फ़िराक में रहते हैं | शादी हो जायेगी तो अपने बच्चे होंगे सब उनका होगा....अबे वो दरवाजा क्यों खोल रहा है हवा आ रही है.... शायद कोई गाड़ी आ गयी थी | चारो तरफ शोर व भाग दौड़ मच गयी | ये फिर चीखा ‘कोई मेरे को भी ले चलो ..कुली भी साला जाने कहाँ  मर गया....अबे चायवाले मुझे ले चल...तभी उसका कुली आ गया ....कहाँ मर गया था अगर मेरी गाड़ी छूट जाती तो साले मेरा ब्याह होना है...सब हरामी मेरी तरह लाचार हो जाते हैं |’ ‘ देख भाई गाली मत देना अभी घंटा भर बाकी है |’कुली बोला | ‘ घंटा.... घंटा बाकी है पैसे तो पूरे लेगा चल अब ले. चल..... उधर क्या अपनी जोरू अम्मा देख रहा है |’ ‘ नहीं....तेरी जोरू देख रहा हूं |’ कुली बोला |’ साला जबान लड़ाता है....तेरी शिकायत करूंगा |’ कुली मुड़ कर बाहर की ओर जाने लगा...ये जोर से चीखा..’ लाचार को सताता है कोई इसको रोको...रो..को.....कहकर रोने लगा...| मेरी गाड़ी भी आ गयी थी कुली मेरा सामान लेकर बाहर निकला हम दोनों भी उसके साथ चल पड़े |
स्वर्ग से असुरों को भगाना ही होगा
लखनऊ | कानपुर में पिछले दिनों किसी संत चोले वाले ने चंद युवाओं की भीड़ में एलान किया कि वह एक ट्रक पत्थर और दो हजार पत्थरबाज लेकर कश्मीर जाएंगे | इससे पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी कह चुके हैं , कश्मीर की चिंता करने की जरूरत नहीं है | सेना को पत्थरबाजों से निपटने की खुली छूट देने के भी सरकारी एलान हो चुके हैं | चार-पांच साल पहले की गरज-तरज देखें तो भाजपा के आला  नेता एक सर के बदले दस सर काट लाने और ५६ इंच की छाती का दम भरते थे | भाजपा की ही तेज-तर्रार नेत्री पूर्व प्रधानमन्त्री को चूडियाँ भेजने के लिए खासी बेचैन थीं | शिवसेना जो हिंसा से कतई परहेज नहीं करती उसके अख़बार ‘दोपहर का सामना ‘ के पहले पेज पर यूपीए सरकार के लिए ‘गाली’ छापी गई थी | आज बहादुरों के चेहरे बदल गये हैं लेकिन बोल वही हैं | हां , तमाम उपदेशक भी ‘मन की बात ‘ सुनाने को बजिद हैं ? इनमें से कोई भी कश्मीर की हकीकत जानने या पढ़ने की या सरकार की सोंच जानने की जरूरत नहीं समझता ?
भारतीय सेना के दो जवानों के सर पाकिस्तानियों द्वारा काट ले जाने से पूरे देश में नाराजगी का माहौल है , हर कोई पाकिस्तान से बदला लेने की सलाहें देते नहीं थक रहा | वहीं कुछ देशभक्त युद्ध के नुकसान गिनाने के उपदेश बांट रहे हैं | याद रहे नोटबंदी के दौरान प्रधानमन्त्री समेत पूरी भाजपा ने दावा किया था कि कश्मीर में पत्थरबाजी रुक गई और आतंकियों की कमर टूट गई | बड़े-बड़े दावे किये गये लेकिन इस बीच १५००० से अधिक लोग घायल , हजारों लोगों की आँख की रोशनी प्रभावित हुई , सैकड़ों जाने गईं | इससे आहत कश्मीरियों की चिंता में क्या किया गया ? एक ओर जश्न-ए-बारामूला के आयोजन को मीडिया में प्रचारित किया गया दूसरी ओर कश्मीर में आक्रोशित छात्रों-छात्राओं ने खुलेआम सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसाये ? प्रधानमन्त्री व उनकी सरकार के आलावा उनके संस्कारी संगठन ने घाटी के लोगों के लिए कौन से क्रांतिकारी कदम उठाये ? जाने-माने इतिहासकार रामचन्द्र गुहा ने अप्रैल के आख़िरी हफ्ते में लिखे अपने लेख में साफतौर पर कश्मीर के प्रति प्रधानमन्त्री के उपेक्षा से भरपूर रवैये का बयान किया है | यहीं प्रधानमन्त्री का पाकिस्तान जाना और बेहद पोशीदा तरीके से उनके विश्वासपात्र पत्रकार वैदिक व भारतीय उद्योगपति सज्जन जिंदल का पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री से मुलाकात करना संदेह नहीं पैदा करता ? इतना ही नहीं पाकिस्तान को दहशतगर्द मुल्क घोषित करने संबंधी विधेयक भी पारित नहीं होने दिया ,और तो और सरकार ने संसद में बहस तक नहीं होने दी ?

इस सबसे आगे सोशल मीडिया पर जानबूझ कर भावनाओं को भडकाने वाले वीडियो व भडकाऊ सामग्री प्रसारित की जाती रही जो कश्मीरियों के प्रति अलगाव पैदा करने में सहायक है | पत्थरबाजी को भी सुनियोजित तरीके से प्रचारित किया जारहा है | वहीं कश्मीर की मुख्यमंत्री जब दिल्ली मदद के लिए आती हैं तो उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता | इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बयान आता है कि कश्मीर की चिंता करने की जरूरत नहीं है | यह सारे हालात किसी साजिश की ओर इशारा नहीं करते ? उससे भी अव्वल भाजपा का एलान पंचायत से संसद तक और देश की समूची धरती पर कमल खिलाना है को नजरंदाज किया जा सकता है ? बहरहाल ५६ इंच की छाती को सरहद पर पाकिस्तानी आतंकियों के सामने तनना ही होगा और देश का गुस्सा शान्त करना ही होगा | भारत के स्वर्ग से असुरों को भगा कर शांति बहाल करनी ही होगी |
तो क्या भगवा अंगौछे में बांधा जा रहा है उप्र ?
सूबे की सियासत में मंदिर की सीढ़ियों से उतर कर हिंदुत्व का परचम थामें विधानसभा में दाखिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पचास दिन बीत गये हैं | इन ५० दिनों में बांटने , डांटने और साधने के साथ लगातार गाय , गांव , गरीबी , गंगा और गड़बड़झालों के मंत्रोचार के आलावा बदले की राजनीति की तलवार पर धार तेज करने के सिवाय कुछ नहीं हुआ ? हां , लोग क्या खाएंगे , कैसे अपना पूजा-पाठ करेंगे , कैसे शादी करेंगे , कसे तलाक देंगे , क्या पढ़ेंगे और ईवीएम के मायने ‘एवरी वोट फॉर मोदी’ का शंखनाद जारी है | इसके साथ ही वे अपनी पूरी ऊर्जा समूचे प्रदेश को मंदिर में बदलने में खर्च करने में लगे हैं | यहां मेरा सवाल है कि क्या उत्तर प्रदेश को भगवा अंगौछे में बाँधा जा रहा है ? कानून ना माननेवालों को प्रदेश छोड़ देने की चेतावनी देते समय हत्या व अपहरण के आरोपी को बगल में बिठा कर किसको कानून का पालन करने का डंडा दिखाया गया ?यहीं एक अहम सवाल क्या सूबे की कानून-व्यवस्था दुरुस्त है ?        


सूबे में आये दिन आतंकवादी पकड़े जाने के साथ आतंकियों की धमकियां और जेलों में बढ़ते बवाल, हत्याएं , लूटपाट , बलात्कार , दबंगई , पुलिस की सनातनी कारगुजारियां , पेट्रोल-डीजल गैस  की चोरी के आलावा सहारनपुर सहित कई जिलों में फसाद के साथ बेलगाम अधिकारियों की फ़ौज क्या शांति का पैगाम दे रही है ? एकदम तजा घटना योगी के चहेते गोरखपुर नगर विधायक ने एएसपी गोरखनाथ चारू निगम से बदसलूकी की लेकिन मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ ?
महज २० दिनों के अख़बारों की चंद सुर्ख़ियों पर गौर फरमाइए , मैनपुरी में पुलिस चौकी के भीतर पिटाई के बाद जान बचा कर भागने पर युवती की गोली मार कर हत्या , लखनऊ में विधानसभा से दो फर्लांग की दूरी पर शिवसेना नेता को मसाज पार्लर की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा कराते पुलिस कप्तान ने रंगे हाथों पकड़ा , कृष्णानगर के एक रेस्टोरेंट के बाहर मानकनगर की रहने वाली मोनिका सिंह पर गोलीबारी , कानपूर में तंबाकू व्यापारी को पुलिसवालों ने लूटा , लूट की रकम अफसरों ने वापस करा मामले को रफा-दफा किया , इलाहबाद में बेटियों से रेप के बाद माँ-बाप संग मार डाला , इलाहबाद में छात्रों ने पथराव , आगजनी , बमबाजी कर बवाल काटा , पुलिस खाना खाती रही कैदी फरार हो गया , अयोध्या में ५ साधुओं ने किया माँ-बेटी से रेप , लोहिया अस्पताल में गर्भवती व एक बच्ची की एक्सपायर इंजेक्शन लगाने से मौत , इटावा के जिला अस्पताल में इलाज नहीं किया बच्चे की मौत हो जाने पर खदेड़ा  पिता कंधे पर ले गया बेटे का शव , बहराइच में गैंग रेप पीड़िता ने लगाई फांसी , चिनहट में ५ लोगों ने २३ वर्षीय युवती से किया गैंग रेप , भाजपा विधायक पर भांजी ने लगाया यौन शोषण का आरोप , भाजपा विधायक ने बरेली में बैंक मैनेजर को अगवा कर पीटा और बिजनौर में रोडवेज अधिकारी से की बदसलूकी , भाजपा सांसद प्रियंका रावत ने एएसपी बाराबंकी की खाल खिंचवाने व सारी मलाई निकलवाने की धमकी दी , कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान ने अपने विभाग के अधिकारी को डांटने-डपटने के साथ सूली पर चढ़ा देने की धमकी दी , विहिप व बजरंग दल आगरा में सीओ को पीटा , हवालात तोड़ने की कोशिश के साथ आगजनी व बवाल काटा , मेरठ में हिन्दू युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं ने एक युवक व उसकी मंगेतर को पुलिस के सामने पीटा , सहारनपुर में भाजपा सांसद व कार्यकर्ताओं ने बवाल काटा व बड़े कप्तान के घर में घुस कर तोड़-फोड़ की , मथुरा में एसएसपी  से भाजयुमो नेता की दबंगई , चारबाग लखनऊ में बेकसूर बुजुर्ग को सिपाही ने बुरी तरह पीटा , चित्रकूट में मिले दो बोरों में मिले ४ बच्चों के शव , बाँदा में बीमे की रकम के लिए बेटों ने अपनी ही माँ की हत्या कर दी , लखनऊ के मडियांव में दबंगों ने दलित की बारात पर हमला किया रोकने पर पुलिस से भी मारपीट की भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा काटा , मेरठ में रिटायर्ड कर्नल के घर मिले विदेशी हथियार ,२ लाख कारतूस व १०० किलो नील गाय का मांस के साथ कई अवैध वस्तुएं फिर भी उन्हें बचाने की कोशिशें ? और पुलिस डायल १०० की लग्जरी गाड़ियों में आराम फरमा रही है या फिर उनसे सवारियां ढोकर कमाई करने में लगी है | फिर भी सूबा ‘प्रसन्नता की रेखा के ऊपर’ ?
इससे भी आगे सूबे में आतंकी हमले की सूचना के बाद हाई अलर्ट जारी कर जहाँ सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है वहीं खुद मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लापरवाह १८ पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से गायब हो जाते हैं , ऐसी ही लापरवाही लखनऊ हाईकोर्ट के नये परिसर की सुरक्षा में भी बरती गई | गौरक्षा के नाम पर गुंडई की खबरें लगातार आ रहीं हैं | यह सब तब जब मुख्यमंत्री , पुलिस मुखिया बार-बार चेतावनी दे रहे हैं | और तो और भाजपा नेता मंत्री तक विवादित बयानबाजी में अपने खम ठोकने में पीछे नहीं हैं | तीन तलाक मुद्दे पर विवादित बयान देने के मुखालिफ़ मुसलमानों ने लखनऊ के ईदगाह चौराहे पर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का पुतला फूंका | दूसरी ओर अपनी पत्नी की हत्या व एक ठेकेदार के अपहरण  के आरोपी नौतनवा से निर्दलीय विधायक अमनमणी त्रिपाठी की गोरखपुर में मुख्यमंत्री के मंच पर मौजूदगी के बाद उनके भाजपा में शामिल होने के कयास को लेकर अमनमणी की पत्नी सारा की माँ सीमा सिंह व मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस कर चेतावनी दी है कि यदि अमनमणी को भाजपा में लिया गया तो वे दोनों दिल्ली में भाजपा दफ्तर के सामने आमरण अनशन पर बैठ जायेंगी | बता दें भाजपा के दिग्गजों ने जहाँ इस पर चुप्पी साध रखी है वहीं भाजपा के एक नेता ने अमनमणी को बड़ी ढिठाई से जनप्रतिनिधि बताने में गुरेज नहीं किया जबकि सीबिआई ने सारा की हत्या के पूरे घटनाक्रम को अदालत में सोंची-समझी साजिश बताया और अमनमणी को हत्या आरोपी बनाते हुए उन पर मुकदमा चलाने की अपील की है | फिर भी सूबे की कानून व्यवस्था में सुधार का राग ? पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा , ‘ पुलिस अपमानित हो रही है जगह-जगह पिट रही है लोग गले में नये रंग का अंगौछा डाल कर थानों में घुस कर बवाल कर रहे हैं , तोड़-फोड़ कर रहे हैं क्या इन्हें इसके लिए लाइसेंस मिल गया है ? पुलिस का ऐसा अपमान आज़ादी के बाद कभी नहीं हुआ जैसा अब हो रहा है | ‘ बसपा सुप्रीमों मायावती ने बयान जारी कर कहा ,’ बेहतर कानून-व्यवस्था भाजपा के वश की नहीं |’ वहीं आप नेता संजय सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा ,’ पिछले डेढ़ महीने में सात पुलिसवालों की हत्या हो चुकी है और आपस में भद-भाव बढ़ा है , भाजपा सरकार सपा सरकार की पार्ट टू साबित हो रही है |’

एक नागरिक का सवाल है , पेट्रोल पंपों में चिप लगाकर चोरी के मामले , निजी स्कूलों की बढ़ी फीस और एंटी रोमियो दल के मामले में सरकार ने अपने कदम पीछे हटाते हुए लचीला रुख अपना लिया है ? यहां यह बताना जरूरी है कि भाजपा के दिग्गज व वेद-पुराण मर्मज्ञ हलक फाड़कर हर मामले पर ओजस्वी बयान देने में पीछे नहीं रहते लेकिन फ़ौजी प्रेम सागर के सर को पाकिस्तानियों द्वारा काट ले जाने पर मौन हैं ? यही नहीं २००७ में गोरखपुर में हुए दंगों में खुद योगी आदित्यनाथ आरोपी हैं | यहाँ यह सवाल पूछना जायज नहीं है कि ‘ क्या यही राजनीतिक ईमानदारी और नैतिकता है जिसका ढिंढोरा समूची भाजपा पीटती है ?’ 
 किसानों की नहीं सुनोगे तो भूखों मरोगे
--प्रियंका वरमा महेश्वरी


किसान! आज की ज्वलंत समस्या। हर जगह उसी की चर्चा, मीडिया, सोशल मीडिया सब जगह। बस उस पर बहस और राजनीति...। उधर किसान परेशान और बेहाल है और उनकी स्थिति ऐसी है कि वो आत्महत्या को अंतिम विकल्प मान बैठा है। ये समस्या कोई आज की नही है करीब 21 सालों से चली आ रही है। 2015 में मौसम की मार की वजह से पांच लाख किसान बर्बाद हो गये। कुछ दूसरी परेशानियां भी जुड़ी हुई हैं किसानों के साथ जैसे जरूरत के वक्त कर्ज का उपलब्ध ना होना, भूजल का स्तर गिर जाने की वजह से सिंचाई के लिए पानी का न मिलना, बिजली की सुविधा का ना होना या मंहगा होना, उर्वरक खाद,कीटनाशक का मंहगा होना, फसलों के लिए बाजार का ना होना, समय पर दाम ना मिलना ये। एक समस्या ये भी आती है कि किसान कर्ज तो ले लेते हैं पर समय पर किस्त नही भर पाते हैं, ऐसी स्थिति में वो कर्ज लेने से कतराते हैं और इन समस्याओं त्रसित होकर वो शहर की ओर पलायन करटे हैं । 2015 में आलू की पैदावार काफी अच्छी हुई थी लेकिन मौसम की मार के चलते और नुकसान न सहन कर पाने की स्थिति में किसानों को आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ा। नुकसान की भरपाई के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 6000 करोड़ देने की बात कही और कहा कि पहले 50% फसलों के नुकसान पर मुआवजा मिलता था जो अब 33% पर कर दी गई है।
पिछली अखिलेश सरकार ने भी सीधे किसानों से उनकी समस्या पूछी और राहत का आश्वासन दिया लेकिन हुआ कुछ नही वही ढाक के तीन पात किसान बेहाल ही रहा। केंन्द्र से भी कोई मदद नही मिली। ऐसी स्थिति में किसान कहां मदद की गुहार लगाये ? फसल के नुकसान की भरपाई, राहत मुआवजा जैसे आश्वासन देकर किसानों से वोट वसूलने की राजनीति भर की जाती है उसके बाद उनकी कोई पूछ परछ नही होती। कृषि मंत्री राधासिंह मोहन ने  बताया कि 56 फीसदी खेती योग्य जमीन को पानी उपलब्ध नही है। 99 बड़े प्रोजेक्ट जिससे 76 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकती है, 25 वर्षों से लंबित पड़ी है। इन परियोजनाओं पर 50 हजार करोड़ का खर्च आना था। भाजपा सरकार बनने के बाद सकार ने सिंचाईं योजना के तहत नाबार्ड के सहयोग से 20 हजार करोड़ का कापर्स  फंड बनाया लेकिन डेढ़ साल तो सिर्फ योजनाएं बनाने में लग गया । दूसरी समस्या खेती की लागत की, व्यवस्था और वितरण की थी।
फसल बीमा योजना में किसानों को कोई विशेष लाभ नही मिला। अलग-अलग राज्य के अलग-अलग रेट, अलग अनाज के लिए भी अलग रेट। एक सीमा तय थी , जिससे ज्यादा मुआवजा नही मिल सकता था, जो ऋणी किसान थे वो ही इसका फायदा उठा सकते थे। 2016 में दलहन का उत्पादन 1.73 लाख टन की उम्मीद जताई गई जबकि 09 लाख टन की मांग बढ़ी और खपत 2.46 करोड़ टन की है। अब शायद इजाफा हो गया होगा। दाल की बढ़ती हुई कीमतों को रोकने के लिये और उत्पाद बढ़ाने के लिए सरकार ने विदेशों में दाल की खेती "कांट्रैक्ट खेती" की बात रखी थी। कुछ आंकड़े जो  फसलों की पैदावार बताती है...
चावल---.(2015-16) (2016-17)
                 91.31.      93.88

कुल दलहन..  (2015-16)
                           5.54
(2016-17)
    8.7
मक्का.... (2015-16) (2016-17)
          .          15.24.     19.3

तिलहन... (2015-16)
                    16.59
(2016-17)
   23.36
कुल खाद्यान्न... (2015-16)
                            124.01
(2016-17)
  135.03
ये सिलसिलेवार बात इसलिए हो रही है क्योंकि आज की सरकार हो या पिछली सरकार हो उससे किसानों को कोई फायदा नहीं मिला बल्कि नई सरकार के वादों से उम्मीद लगाये किसान नोटबंदी की मार से दोहरा हो गया। प्रधानमंत्री ने करीब 14 करोड़ किसान परिवारों पर सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की लेकिन नकदी की समस्या का समाधान नही किया। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि जिन किसानों ने रबी की फसल के लिए जिला सहकारी बैंको से और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों से कर्ज लिया हो उनको 1जनवरी से 60 दिन के ब्याज का भुगतान नही करना होगा। लेकिन इसका विशेष लाभ नजर नही आया क्योंकि दिये गए फसल सत्र में कुल कर्ज का करीब 70% किसानों द्वारा अनुसूचित वाणिज्य बैंको से लिया जाता है और महज 30%  डीसीसीबी, पीएसीएल और क्षेत्री ग्रामीण बैंको से लिया जाता है। 2016-17 में केन्द्र सरकार ने 9,00,000 करोड़ रूपये कृषि ऋण दिये जाने का लक्ष्य रखा जिसमें वाणिज्यिक  बैंकों का अधिकतम हिस्सा है। केन्द्र सरकार ने ऋण के भुगतान की सीमा 2 महीने की बढ़ाई लेकिन इस सुविधा से किसानों से बहुत लाभ नही हुआ। सत्र मे यदि किसान एक लाख का कर्ज लेता है तो 7% की दर से पूरे साल का ब्याज 7000 होता है और दो महीने के ब्याज की माफी 1200 आयेगी जो कि बहुत मामूली है। प्रधानमंत्री ने अपनी दूसरी घोषणा मे कहा कि नाबार्ड को किसानों को क्रेडिट व कर्ज देने के लिए 2016-17 वित्त वर्ष में 20,000 करोड़ रूपये की सुविधा देंगे। 40 प्रतिशत से ज्यादा किसान संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था से अलग है। किसानों को सस्ती दरों पर कर्ज देने के लिए 21000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई थी लेकिन 1990 के बाद से कृषि क्षेत्र मे संस्थागत ऋण की हिस्सेदारी 40% के करीब स्थिर है और हालात सुधरे नही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों को रूपे में बदल दिया जायेगा ताकि किसान आसानी से कैश निकाल सके लेकिन नोटबंदी के दौर में बैंक और एटीएम नगद निकासी की सीमा निर्धिरित रहने के कारण किसान इसका फायदा नही उठा सका। कैश में खाद और बीज खरीदनें उनको परेशानी हुई। घर में रखे गल्ले को ही बीज की तरह उपयोग में लिया। सूखा, ओलावृष्टि की मार सहते जो किसानआत्महत्या कर रहे हैं वो 39% कर्जदार थे और नुकसान भरपाई का मुआवजा भी नही मिला था। ये अब तक पिछले दो सालो की बात है अब वर्तमान समय की बात करते हैं करीब 45% या इससे ज्यादा भी हो सकता है किसानों ने आत्महत्या की। इन भूमिपुत्रों पर सियासी राजनीति चलती है। बैंको, सूदखोरों से बचने के लिए और अपनी जमीन खो जाने के डर से गरीब किसान के पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नही बचता है। भाजपा पर वरूण गांधी ने किसानों की आत्महत्या के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया । आंकड़ों में 7500 किसानों के आत्महत्या करने की बात कही गई जबकि लगभग 50,000 किसानों ने आत्महत्या की है। झारखंड के किसान टमाटर की खेती से बहुत परेशान हुए। टमाटर की बिक्री के लिए खरीदार नही मिल रहा था और खेती के लिए किसानों ने 40 हजार कर्ज भी लिया था नतीजा किसान खुद ही अपनी खेती नष्ट करने लगे। करोड़ों के टमाटर रोड पर फेंक दिये गये। अब कर्ज चुकाने के लिए किसान मजदूरी की तलाश मे शहर की ओर पलायन कर रहा है।
इधर तमिलनाडु के ऊपर भी संकट गहराया .... हर रोज करीब 100 किसान मौत को गले लगा रहे थे। राज्य द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता नही के बराबर रही। एक अनुमान के मुताबिक यह राज्य के आर्थिक इतिहास का सबसे खराब वित्तीय वर्ष है। जिन मुफ्त सौगातों के बारे में सरकार ने वायदे किये थे उसके लिए पैसों की जरूरत होती है..। बहरहाल तमिलनाडु का किसान जंतर मंतर पर अपना भाग्य आजमा कर निराश हुआ है । करीब 21 सालों से किसान तकलीफ झेलता आ रहा है मदद के नाम फर मामूली राहतें और सियासी वायदे मिलते हैं उसे।
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किसान को बुआई के समय से ही डर लगने लगता है। समय से बीज नही मिलता है, जो मिलता है उसमें नकली ज्यादा होता है। कमीशन के चक्कर में गुणवत्ता पर ध्यान नही दिया जाता है।
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सिंचाईं के नाम पर किसानों को समय से पानी नही मिलता। सरकार के भारी भरकम दावे और व्यवस्था सिर्फ कागजों पर ही देखने को मिलती है।
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बुंदेलखंड में दो साल से सूखे की मार झेल रहे किसानों को न तो बिजली मिली और न ही नलकूप चले, न बिजली बिल माफ हुआ और न ही बिजली सस्ती हुई।
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कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हुआ और उस नुकसान का मुआवजा अभी तक किसानों को नही मिला। किसानों को सियासी मुद्दा बनाया जाता है लेकिन उनकी पीड़ा को कोई समझना नही चाहता।
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कानपुर और फरूखाबाद के अलावा आलू की मंडी कही नही है। आलू से बनने वाली चीजों के कारखाने बंद हो गये हैं या है ही नही। ऐसे में उत्पादित आलू की खपत मुश्किल हो जाती है, नतीजा किसानों को औने पौने दाम में बेचना पड़ता है। यही हाल गन्ने की फसल का है समय पर भुगतान नहीं और कोई खुली मंडी ना होने से किसानों ने गन्ना उत्पादन बंद कर दिया ,लोगों के रोजगार बंद हो गये।
देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में यूपी सरकार ने सिर्फ चुनावी ढोल बजाया। उ.प्र. में 4.5 करोड़ युवा मतदाता है। सरकार ने लैपटाप, टैबलेट, स्मार्ट फोन बाटने की बात की लेकिन किसानों की दुर्दशा पर कोई बात नही। पंजाब और उत्तर प्रदेश में कृषि से जुड़े मतदाताओं की संख्या काफी बड़ी है। राजनीतिक दलों ने किसानों के लिए कर्ज माफी का लोभ लुभावन वादा किया। विशेषज्ञों के मुताबिक कर्ज माफी से छोटे किसानों को लाभ नही होता  है। इसका सबसे ज्यादा फायदा अपेक्षाकृत बड़े किसानों को होता है। छोटे और सीमांत किसान की तो बैंकिंग तंत्र तक पहुंच ही नही होती है। इस तरह के फैसले से बैंकिंग प्रणाली को नुकसान होता है। किसान कर्ज माफी के बजाय समय पर कर्ज मिल जाये उसे ज्यादा महत्व देता है। कर्ज माफी किसानों के हक मे स्थाई उपाय नही है। किसानों की ऋणमाफी को लेकर एसबीआई की चेयरमैन अरूंधती भट्टाचार्य ने आपत्ति जताई, उन्होंने कहा कि किसानों की मदद तो हो लेकिन ऋण का अनुशासन बना रहना चाहिये। उनका कहना था कि कर्ज माफी जैसी योजनाओं से बैंक और कर्जदार के बीच जो एक अनुशासन बना रहता है वो बिगड़ता है।
नोटबंदी की अवधि पूरी होने पर प्रधानमंत्री ने किसानों के लिये बड़ी घोषणाएं की। सोसायटी कोआपरेटिव कर्ज पर किसानों को छह महीने का ब्याज माफ किया। नाबार्ड को 21,000 करोड़ के अलावा सरकार 20,000 करोड़ देगी।5 करोड़ किसान कार्ड कही भी खरीद बिक्री के लिये रूपे कार्ड में बदलेंगे लेकिन अभी तक जमीन पर कही कुछ होता नही दिख रहा है। पिछले साल की तरह इस बार भी सरकार किसानों को राहत देने की बात कर रही है। आदित्यनाथ योगी ने सत्ता मे आते ही छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला लिया। 1 लाख रूपये तक का फसली कर्ज माफ कर दिया गया। हालांकि यह उनके पीएम का चुनावी वादा था जिसे योगी जी ने पूरा किया लेकिन इस सबके बावजूद किसानों को कर्ज माफी से कोई ठोस लाभ मिलने के आसार नही दिखते । राज्य की ऋणग्रस्तता पिछले पांच साल में काफी बढ़ गयी है। कर्ज माफी का निर्णय राज्य पर अतिरिक्त भार बढ़ायेगा। करीब 36,000 करोड़ से अधिक कर्ज माफ करने की बात कही गई है लेकिन सिर्फ फसल के लिए लिया गया कर्ज ही कर्ज नही है बल्कि ट्रैक्टर, पम्पसेट और भी खेती से जुड़ी हुई चीजों पर लिया गया कर्ज भी तो कर्ज ही है फिर भी सराहनीय कदम है बशर्ते फलीभूत हो |
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लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद की बात सरकार के लिए एक चुनौती से कम नही है क्योकि बीते पांच सालों में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ कि जब गेहूं की सरकारी खरीद लक्ष्य से ज्यादा हुई और उसका श्रेय शासन और खाद्य विभाग के अधिकारियों को गया। खुद खाद्य विभाग के अधिकारियों का मानना था कि बड़े लक्ष्य को पाने  के लिए सरकार को मजबूत कदम उठाने होंगे। गेहूँ को दूसरे प्रदेशों में जाने से रोकना होगा, भुगतान की व्यवस्था पर जोर देना होगा ताकि किसान "सरकारी खरीद केंद्र" की ओर आकर्षित हो। खरीद के बाद अनाज को रखने की व्यवस्था सुचारु होनी चाहिये। किसानों की तकलीफों को सियासी मुद्दा बनाने के बजाय उनके हितों को ध्यान मे रखा जाये तो भी वो राहत महसूस करेगा। उ.प्र. में करीब 2.5 करोड़ किसान है। 85% छोटे और सीमांत किसान है। 77 लाख किसानों ने कर्ज लिया है और इसमें से 55 लाख छोटे किसान है। 70% कृषि लोन बैंको व कोआपरेटिव क्षेत्र से लिया जाता है। कोआपरेटिव बैंक से लोन कम ही मिलता है। एक रिपोर्ट के अनुसार 72 फीसद आत्महत्या करने वाले किसान छोटे और गरीब हैं। जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम जमीन है। छोटी जमीन होने के कारण उन्हें  मंहगा बीज, कीटनाशक, मजदूरी तक का मंहगा खर्च कर्ज लेकर ही उठाना पड़ता है। अगर उसके बाद प्राकृतिक आपदा आ गई तो किसान के लिए मुसीबतो का अंबार खड़ा हो जाता है। कर्ज की मार से दबा और उसे ना चुका पाने की स्थिति में वो आत्महत्या की ओर अग्रसर होता है।


ग्रामीण भारत दिन प्रतिदिन हाशिये पर जा रहा है। आजादी के बाद के दशक में जहां कृषि, नेशनल जीडीपी में लगभग 55% की भागीदारी निभाती थी, आज किसानों की तादाद बढ़ने के बावजूद 14 से15 फीसदी तक सीमित है। वर्तमान "मूल्य निर्धारण नीति" से अब तक किसानों का भला नही हो पाया है. अब इस नीति को हटा कर "आय नीति" की जरूरत महसूस होने लगी है। फसलों की बुआई से लेकर अंतिम प्रक्रिया तक का आई लागत का ही आंकलन न होना भी इस प्रक्रिया त्रुटि है। जिसका सीधा असर  किसानों पर पड़ता है।
कृषि विभाग के आंकड़ो के मुताबिक साल 2016-17 में शासन की तरफ से जिले में सोलर  पंप लगाने का लक्ष्य दिया गया था जो अधर में है | गर्मियों के शुरू होते ही अग्निकांड की घटनाएं बढ़ने लगती हैं अधिकतर अग्निकांड की घटनाओं में विद्युत महकमें की लापरवाही सामने आ रही है। विद्युत महकमें में न तो बजट का अभाव है और न तारों का, फिर भी समय से ग्यारह हजार वोल्टेज लाइन के तार क्यों नहीं बदले गए। जिसके चलते गिरते तारों से जिले के विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल किसानों की जल कर राख हो रही है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर जांच कराई जायेगी। आम आदमी व पीड़ित किसान रोना रो रहे हैं कि उनके खेतों के ऊपर गए हाईटेंशन तार को दुरूस्त रखा गया होता तो शायद अग्निकांड नही होता। प्रतिवर्ष जर्जर तारों को बदलने के लिए पावर कारपोरेशन की तरफ से बजट मुहैया कराया जाता है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। बदहाली और आत्महत्या की ओर जाते किसानों की परेशानी को दूर करना तो दूर..आश्वासन तक नही..। अगर समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो किसान कहां जायेगा ? उससे भी बड़ा सवाल हम कहां जायेंगे क्या खायेंगे ?