Sunday, May 13, 2012

सिनेमा, सेक्स और सियासत

हैदराबाद। बाॅलीवुड की तर्ज पर टाॅलीवुड की नाकाम अभिनेत्री तारा चैधरी को सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में बंजारा हिल्स पुलिस ने मार्च के आखिरी हफ्ते में गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी विशाखापट्टम की श्री लक्ष्मी की शिकायत पर हुई। तारा इससे पहले 2005 में भी एक बार गिरफ्तार हुई थी, तब पुलिस के एक उच्चाधिकारी के दबाव के चलते उसे छोड़ दिया गया था। तारा के पति आर दुर्गा प्रसाद भी अपने दोस्त हनीफ के साथ उसकी मदद करते थे। तारा ने पुलिस के सामने माना कि उसके नियमित ग्राहकों में पांच कैबिनेट मिनिस्टर, दो कांग्रेसी सांसद और दो तेलगूदेशम पार्टी के एमएलसी व कई युवा विधायक, आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के अलावा कई अभिनेता हैं।
    तारा की बात की सच्चाई जाहिर करती है अवकाश प्राप्त पुलिस महानिदेशक एम.भास्कर की उच्चन्यायालय में दाखिल की गई अग्रिम जमानत की अर्जी। हालांकि उन्होंने अपनी सफाई में प्रेस से कहा, ‘मैं तारा को जानता हूं। वो मेरे नाम का गलत फायदा उठाती रही है। इसीलिए पुलिसिया उत्पीड़न से बचने के लिए मैंने ऐसा किया।’ हालांकि पुलिस ने किसी वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं किया फिर भी कांग्रेस के सांसद रायपति संभाशिव राव और कृषि मंत्री कन्ना लक्ष्मी नारायण के नाम सुर्खियों में हैं। तारा का आरोप है कि सांसद उसका उपयोग अपने राजनैतिक मामले निपटाने के लिए किया करते थे। उन्होंने 1 करोड़ रूपए की पेशकश अपने विरोधी नेता लक्ष्मीनारायण को बदनाम करने के लिए की थी। वे दोनों हमारी लड़कियों को इस्तेमाल करते थे। दोनों नेताओं ने तारा के आरोपों को खारिज किया है।
    तारा का असली नाम रावेल्ला राजेश्वरी है। उसने पुलिस के सामने 2005 से सेक्स रैकेट चलाने की बात कबूली है। तारा के रैकेट में दो दर्जन से अधिक सुन्दर लड़कियाँ थीं। वो इन्हें हैदराबाद, विजाॅग व बंगलौर के उच्चवर्गीय ग्राहकों के पास भेजती थी। वो एक ग्राहक से 50 हजार से लेकर एक लाख तक वसूलती थी। जो ग्राहक उसकी लड़कियां नहीं मांगते उन्हें मोबाइल क्लिपिंग या सीडी के जरिए ब्लैकमेल तक किया जाता था। इसी तरह जो लड़की उसके साथ काम करने से मना करती उसे भी बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। तारा इन लड़कियों को 15 हजार रूपया प्रति सप्ताह खर्च के लिए देती थी।
    यहां बताते चलें कि इन लड़कियों को फिल्मों में काम दिलाने का लालच देकर फंसाया जाता था। तारा पिछड़े क्षेत्र के प्रकाशम् जिले से 2002 में स्नातक पास करने के बाद हैदराबाद फिल्मों में काम करने की नियत से आई थी। उसने तीन फिल्मों में छोटे-मोटे रोल भी किये, लेकिन किसी अच्छी फिल्म में काम नहीं मिला तब निराश होकर वह ऊँचे दर्जे की काॅलगर्ल हो गई। उसके बंजारा हिल्स के मकान व पास के एक गेस्ट हाउस में गई रात तक तमाम वीआईपी आते-जाते रहते थे। तारा इन वीआईपी ग्राहकों की बातचीत से लेकर उनके अंतरंग क्षण तक की रेकर्डिंग मोबाइल व लैपटाप में सुरक्षित रखती थी। पुलिस ने लगभग दो सौ आॅडियों सीडी भी बरामद की है। इसी का भय दिखाकर ग्राहकों व लड़कियों को बदनाम कर देने की धमकी भी देती थी।
    तारा के ग्राहकों की फेहरिश्त में टाॅलीवुड और राजनीति की कई नामी गिरामी हस्तियों के साथ पुलिस के आला अफसर भी थे, वहीं वह हेलीकाफ्टर हादसे में मारे गये आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी के साथ अपने फोटो का भी बखूबी इस्तेमाल करती। तारा की गिरफ्तारी ने राजनैतिक हल्कों में खासी हलचल मचा रखी है।

हा.... इ इ ई... सेक्सी.... क्राइम

मुंबई। सिनेमा की दुनिया में बेताब ग्लैमर, बेचैन सेक्स और बेखौफ अपराद्द ने जहां युवाओं को आकर्षित किया, वहीं पल भर में टपोरी से करोड़पति बनने के नुस्खे ने भी खासी शोहरत पाई। इसी ख्याति में छोटे पर्दे का तड़का पूरी दुनिया को ललचाने लगा। नतीजे में पाकिस्तान से लंदन तक की युवतियों ने बाॅलीवुड के कैमरे के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर फेंक दिये। देश भर के छोटे शहरों से ‘हीरो’ बनने की तमन्ना पाले मायानगरी पहुंचे तमाम नाकाम नौजवान हाथों ने हथियार थाम लिये। फिर ‘हिरोइन’ बनने की कतार में लगी युवतियों में कइयों की देह पर आपराधिक उत्पात होने लगे और समन्दर की छाती पर अग्नेयास्त्रों के धमाके।
    साठ के दशक में अक्खी मुंबई पर हाजी मस्तान का राज था। मस्तान के संबंध फिल्मी दुनिया की कई हस्तियों से थे, तो फिल्म अभिनेत्री सोना उनकी प्रेमिका/पत्नी रहीं। 80-90 के दशक में डाॅन दाऊद इब्राहीम की प्रेमिकाएं रहीं ‘राम तेरी गंगा मैली’ से चर्चा में आई अभिनेत्री मन्दाकिनी और बड़े सितारों के साथ घूमकेतू की तरह आईं और गायब हुई ममता कुलकर्णी। इसी दौड़ में शामिल रही कई जेलों की यात्राएं करने वाली मोनिका बेदी। अबू सलेम ‘डी’ कम्पनी का बड़ा नाम मोनिका का शौहर रहा। इन सभी नामों ने काफी सुर्खियां बटोरी। आज भले ही दाऊद का सिक्का मैला हो गया हो, लेकिन शाइनी आहूजा, शक्ति कपूर, अमन वर्मा, मधुर भंड़ारकर, प्रीति जैसे नामों की सुर्खियों के साथ माॅडल/अभिनेत्री सिमरन सूद, नूपुर मेहता, रोजलीन खान के नामों की खासी चटखारेदार चर्चा है। सिमरन हत्या के अपराध में गिरफ्तार हैं। उनके साथ उनके खाबिंद रहे विजय पलांडे भी सीखचों के पीछे हैं। वहीं अभिनेत्री मीनाक्षी थापा की हत्या उन्हीं के दो साथी कलाकारों ने कर दी। उनका धड़ इलाहाबाद में बरामद हुआ। सर पुलिस अभी तलाश रही हैं। तो कौन-कौन हाल के दिनों में मायानगरी से अपराध के अग्निकुड में गिरा, एक नजर देखते हैं।
मीनाक्षी थापा: 2005 में ‘शहर’ फिल्म और पिछले साल 404 में मीनाक्षी ने छोटे-मोटे रोल किये थे।
दो सहकलारों अमित-प्रीति ने 15 लाख फिरौती न मिलने के कारण मीनाक्षी की हत्या कर दी।
    26 साल की मीनाक्षी देहरादून में नृत्य की शिक्षिका थी। उसने एमकेपी कालेज से स्नातक तक शिक्षाप्राप्त की थी। विमानन का डिप्लोमा भी ले रखा था। बावजूद उसके नृत्य से लगाव के चलते उसका अंतिम लक्ष्य उसे मुंबई की फिल्मी दुनिया ले गया। इसी मायानगरी में निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर की फिल्म ‘हिरोइन’ के सेट पर इलाहाबाद के रहने वाले जूनियर आर्टिस्ट अमित जायसवाल व प्रीति सूरी से हुई थी। इन दोनों ने मीनाक्षी को भोजपुरी फिल्मों में काम दिलाने का लालच देकर अपने शहर इलाहाबाद ले जाकर उसे कैद कर लिया व उसकी मां से 15 लाख रूपयों की फिरौती मांगी।
    अमित गले-गले तक कर्ज में डूबाथा। उसे पता चला था कि मीनाक्षी नेपाल के राजघराने से सम्बन्द्द रखती है। इसी बीच इलाहाबाद में प्रीति के पिता ने उसे अपने घर पर रखने से इंकार कर दिया था और मीनाक्षी की मां ने भी पैसा देने में अपनी मजबूरी जता दी थी, लेकिन मीनाक्षी के भाई पूर्व सैनिक नवराज ने उसके खाते में 60 हजार रूपए जमा कराये थे, जिसमें से 15 हजार रूपए मीनाक्षी के एटीएम से दोनों अपहरणकर्ताओं ने निकाले। हताश अपहरर्ताओं ने मीनाक्षी की हत्या कर दी। पुलिस ने मीनाक्षी का धड़ प्रीति के घर इलाहाबाद जार्ज टाउन के पास एक टैंक से बरामद किया है। सर की तलाश जारी है।
सिमरन सूद: 2004में समलैंगिकता पर आधारित सी-ग्रेड फिल्म ‘अनोखा अनुभव’ में काम किया।
    अरूण टिक्कू और करण कक्कड़ की हत्या में विजय पलांडे के साथ सह अभियुक्त है।
    सिमरन सूद 25 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते तमाम बिस्तरों की जीनत और संतोष शेट्टी गैंग के कुख्यात विजय पलांडे की तलाकशुदा पत्नी बन चुकी थीं। पलांडे उसका इस्तेमाल अपने कारोबारी फायदे के लिए करता था। पलांडे अनूपदास-स्वराज दास पिता-पुत्र हत्याकांड में जेल में था। 1998 में सिमरन की मदद से पैरोल पर बाहर आया था। पलांडे के संपर्क शक्तिशाली राजनेताओं, पुलिस के आला अफसरों और फिल्म जगत की नामचीन हस्तियों से थे। पलांडे ने ही सिमरन को अरूण टिक्कू के बेटे अभिनेता अनुज व फिल्म निर्माता करण कक्कड़ से मिलवाया था। पुलिस जांच में पता चला है कि करण सट्टेबाजी और देह व्यापार के बड़े रैकेट से जुड़ा था। उसने इन धंघों में नुकसान के चलते सिमरन सूद का सौदा एक बड़े व्यवसायी से करने की ठानी जिसका पता पलांडे को लग गया। पलांडे अपनी ‘सेंटर’ सहकर्मी को खोना नहीं चाहता था। इसके अलावा प्रापर्टी के भी झगड़े थे जिनमें उलझकर पलांडे ने करण की हत्या कर दी। इससे पहले पलांडे टिक्कू की हत्या उनके फ्लैट में कर चुका था। पुलिस की जांच जारी है।
मारिया सुसईराज: कन्नड़ फिल्मों छोटी-मोटी भूमिकाएं करती हुई बड़े रोल पाने के लिए संघर्षरत थीं।
    मारिया ने अपने प्रेमी एमिल जेरोम मैथ्यू के साथ टीवी एक्जीक्यूटिव नीरज ग्रोवर की हत्या अपने मलाड स्थित फ्लैट में की थी। यह अपराध मारिया ने 27 साल की उम्र में अपने मंगेतर के सामने अपने को पाक साफ साबित करने के लिए किया था। मारिया-जेरोम की सगाई हो चुकी थी। जेरोम नेवी में अधिकारी था। उसके बाहर रहने के दौरान मारिया के सम्बन्ध नीरज से हो गये। नीरज ने मारिया से अपनी कम्पनी के टीवी सीरियल में उम्दा रोल देने का वायदा कर उससे सम्बंध बना रखे थे।
    एक दिन मारिया का मंगेतर अचानक उसके फ्लैट पर पहुंच गया। उस समय मारिया नीरज के साथ थी। जेरोम ने नीरज की हत्या कर दी। हत्या के बाद मारिया ने जेरोम के साथ मिलकर नीरज के शरीर को टुकड़ों में करके प्लास्टिक के थैलों में भरकर जंगल सहित कई जगहों पर फेंक दिया। जेरोम ने बाद में पुलिस के सामने अफसोस जाहिर किया। वहीं मारिया ने कहा कि उसने साक्ष्य मिटाने में मदद करने के साथ जेरोम के निर्देशों का पालन किया।
रोजलीन खान: ब्रेस्ट कैंसर कार्यक्रम के लिए अद्दनंगी होकर फोटो खिंचाने से चर्चा में आई माॅडल और हाल ही में ‘धमाकल चैकड़ी’ फिल्म में काम मिला है। रोजलीन के अंतरंग सम्बन्ध करण कक्कड़ से बताए गये और सिमरन सूद से भी दोस्ती की बात कही गई लेकिन रोजलीन ने इससे साफ इन्कार कर दिया। पुलिस ने भी आरंभिक जांच के बाद फिलहाल उन्हें छोड़ दिया है।
    रोजलीन ने इसके तुरंत बाद मुंबई में पेटा (जानवरों के लिए काम करने वाले संगठन) के लिए एक कैम्पेन में सेमी न्यूड होकर (ब्लड बाॅथ) लाल रंग के टब में नहाते हुए फोटो शूट कराया हैं। रोजलीन को पिछले साल दिसंबर में मुंबई के एक ड्रग सिंडीकेट का खुलासा करने के लिए ‘लायना गोल्ड’ एवार्ड से नवाजा गया था। यह एवार्ड उन्हें अभिनेत्री दिया मिर्जा के हाथों मिला था।
नूपुर मेहता: सनी दयोल की फिल्म ‘जो बोले सो निहाल’ में छोटा सा रोल करने वाली नूपुर मेहता हाल में क्रिकेट में सट्टेबाजी को लेकर सुर्खियों में आईं। नूपुर फैन्टा की विज्ञापन फिल्म में काम कर चुकी हैं व पाइरल की कैलैण्डर गर्ल भी रही हैं। उनका नाम पिछले वल्र्डकप के दौरान इंडिया-पकिस्तान के बीच खेले गये मैच में मैच फिक्सिंग में बुकीस द्वारा उनके इस्तेमाल को लेकर खासा उछला था। मैच फिक्सिंग की पूरी खबर लंदन के ‘संडे टाइम्स’ में छपी थी। नूपुर ने इस सबसे इन्कार किया था। उसने अखबार पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा भी दायर किया हैं। उसकी योजना है कि इन रूपयों से वह फिल्में बनायेगी।
    नूपुर शेखर सुमन के मशहूर शो ‘मूवर्स एण्ड शेखर्स’ मे ंभी 15 मिनट के लिए बतौर मेहमान दिखी थी। ‘बिग बाॅस’ में भी दिखाई दी थीं। नूपुर सेवानिवृत सेना के अद्दिकारी की बेटी हैं।
मोनिका बेदी: 1995-2003 तक लगभग 16-17 फिल्मों में काम करने वाली मोनिका बेदी का नाम डाॅन दाऊद इब्राहीम के दाहिने हाथ रहे अबू सलेम की पत्नी के रूप में खूब सुर्खियों में आया। हस्तिनापुर में पैदा हुईं नार्वें में पली बढ़ी 39 साल की मोनिका ‘बिग बाॅस’ के घर में भी रह चुकी हैं। वे 2002 में सलेम के साथ आईं। उन्हें फर्जी पासपोर्ट के मामले में पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया। भारत प्रत्यापर्ण के बाद पांच साल की सजा 2006 में हुई थी तब उन्हें हैदराबाद जेल में रहना पड़ा था। आंद्द्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें तीन साल बाद ही रिहाई दे दी। अपनी रिहाई के बाद से वे स्ट्रगल कर रही है।

गलियों में खड़े वाहन या यमदूत

लखनऊ। रहने को एक कोठरी, खाना, नहाना बमुश्किल गलियारे में... मगर हैं दो-तीन बाइकों या आॅटो टैम्पो के मालिक। ये बाइकें/आॅटो चार-पांच फीट की गलियों में पार्क रहती हैं। अगर गली सात-आठ फिट चैड़ाई लिए है तो चार पहिया वाहन भी पार्क दिखाई दे जायेंगे। शहरों में यह आम नजारा है। राजद्दानी लखनऊ में नई उग आई कालोनियों में घरों के दरवाजे फुटपाथों पर बाकायदा जाली से घेरकर गैराज की शक्ल दे दी गई है। इससे बदतर हालात पुराने लखनऊ की गलियों-सड़कों में हैं। बाजारों, काम्पलेक्सों और माॅल के सामने अतिक्रमण की गई पार्किंग अखबारों, पुलिस, नगर निगम को बंद आंखों से भी दिखाई दे जाती है, लेकिन खुली आंखों से भी गलियों में नाजायज पार्किंग किसी को नहीं दिखाई देती।
    इस तरह की पार्किंग से कई नुकसान हो रहे हैं और किसी बड़े हादसे से इन्कार भी नहीं किया जा सकता। गरमी अपनी तपिश बढ़ाने लगी है, मच्छरों, आवारा जानवरों के मेले में कूड़ा-कचरे के साथ नालियों में गंदगी की रेल-पेल सड़ांध बढ़ा रही है। कचरा उठ नहीं पा रहा है, गलियों में झाड़ू लग नहीं पा रही है। नगर निगम को भवन/जलकर न देने वाले जिम्मेदार नागरिक अपने घरों व व्यावसायिक स्थलों का कूड़ा गलियों/सड़कों पर फेंक निश्ंिचत हो जाते हैं। कई समझदार कूड़े में आग लगा देते हैं। इससे जहां संक्रामक रोग के खतरे संभावित हैं, वहीं अग्निकांड जैसे हादसे भी संभावित हैं।
    गलियों में सफाईकर्मी अव्वल तो पहुंचते नहीं, यदि पहुंचते हैं तो उनकी कूड़ा-कचरा उठाने वाली ठेला गाड़ी अन्दर जा ही नहीं पाती। चार फिट की गली में दो फीट में बाइकों की कतार होती है। यहीं हाल आठ फीट की गली का भी होता है। सफाईकर्मी भी अपनी हाजिरी बजाकर गायब हो जाता है, फिर कूड़े के ढेर पर कुत्तों/गाय-सांड का राज होता है। कचरा बीनने वाले अपने मतलब का सामान उसमें से बीनकर अक्सर उसमें आग लगा देते हैं। ऐसे हालातों में यदि कोई बड़ा अग्निकांड हो गया तो दमकल के लोग गलियों में अपने साजो-सामान के साथ कैसे पहुंचेंगे? इससे भी बदतर बजबजाते कचरे से फैलनेवाले संक्रामक रोग से निपटने के लिए राहतकर्मी गलियों के भीतरी हिस्सों में कैसे पहुंचेगे? और भी बड़ा सवाल है कि इसका जिम्मेदार कौन होगा? नगर निगम, यातायात पुलिस या वे लोग जो गलियों में अवैधरूप से अपने दो-तीन या चार पहिया वाहन खड़े करते हैं।
    गौरतलब है नगर निगम ने सफाईकर्मियों की निगरानी के लिए सुपरवाइजर भी तैनात किये हैं, मगर मजाल है कि वे गलियों में झांक लें। यदि सफाईकर्मी या सुपरवाइजर अपने अद्दिकारियों को इन वाहनों से आनेवाली दिक्कतों के चलते सफाई न हो पाने की बात बताएं तो शायद हल निकल सकता है। इसी तरह नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें तो शायद इस समस्या का हल आसानी से निकल सकता है। क्या कोई हादसा होने से पहले कोई इस समस्या के निदान के लिए पहल करेगा?

नाम-पता बताओ तो बिठाएंगे!

लखनऊ। कहां जाओगे... किस जगह उतरोगे.... कितने लोग हो... क्या सामान है...? ये वो सवाल हैं, जिनका सामना राजधानी की एक बड़ी आबादी को रोज करना पड़ता है। आॅटो व रिक्शेवाले सवारी बैठाने से पहले इस तरह के सवाल आमतौर पर करते है। खैरियत है कि वे यह नहीं पूछते कि फलां जगह क्यों जाओंगे? अलबत्ता सफर के दौरान बातचीत में नाम-पता पूंछना नहीं भूलते। हां, अगर सवारी महिला/लड़की है तो फिर कुछ नहीं पूंछना। पैसे भी कम दे तो चलेगा। सवारी को तय जगह से पहले ही उतार देना, पैसों के लिए झगड़ना, रास्ते भर ऊंची आवाज में गाने बजाना आम बात है। रिक्शेवाले एक फर्लांग जाने के लिए दस-पन्द्रह रूपए किराया वसूलते हैं। चारबाग स्टेशन से हुसैनगंज बीस-पच्चीस तो अमीनाबाद के लिए तीस-चालीस रूपए किराया लेते हैं, वहीं आॅटोवाले पांच रूपए। रिक्शेवालों में कई तो सवारी को बुजुर्ग या लड़की देखते हैं तो बताते बीस हैं और गंतव्य पर तीस मांगते हैं। यह इसलिए कि सुनने समझने के फेर में तमाशाई भीड़ भी गरीब रिक्शेवाले के साथ खड़ी हो जाती है। इसी तरह आॅटो वाले भी अनाप-शनाप किराया वसूलते हैं। आॅटांे में सवारी करना लड़कियों के लिए तो बेहद तकलीफदेह है। बसों में जहां खुलेआम छेड़छाड़ होती है, वहीं आॅटो में उनके ड्रªाईवर अमिताभ/अमिर खान के सिनेमाई अंदाज में लड़कियों से बाकायदा प्रेम पींगे बढ़ाने की हिमाकत तक कर बैठते हैं। इसी कारण शहर में स्कूटी/बाइक  पर फर्राटा भरते लड़के- लड़कियों की बाढ़ सी आ रही है। शहर के सभ्रान्त परिवारों में वाहनों के बढ़ने का एक कारण आॅटो चालकों की मनमानी भी है। इन आॅटो/रिक्शावालों पर कोई अंकुश लगाने वाला भी नहीं है।

क्रांतिदिवस पर चलो जंतर-मंतर

लखनऊ। अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री पद्मनाथ त्रिपाठी ने गए सप्ताह प्रेस से कहा कि राजधानी लखनऊ जहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं विद्दानसभा के साथ सभी प्रशासनिक प्रमुखों के कार्यालय एवं निवास है, वही स्थान आज घपले-घोटालों और हत्याओं का गढ़ बन गया है, निवर्तमान शासन में भ्रष्टाचार एवं सरकारी खजाने की लूट की सारी सीमाएं पार कर जो कीर्तिमान स्थापित किये गये हैं वो अत्यन्त ही पीड़ा दायक है।
    गत विधानसभा चुनाव में सपा के 224 विधायक चुन कर आये हैं यह आश्चर्यजनक नहीं है। सबसे बड़ी आश्चर्यजनक घटना यह है कि इतने बड़े घपले-घोटालों के जनक के भी 80 प्रत्याशी भी चुनकर आ गये, यह वर्तमान राजनैतिक पतन की पराकाष्ठा एवं जनतंत्र का खुल्लम-खुल्ला उपहास है। इसमें जनता का भी दोष है। प्रजातंत्र को नोटतंत्र और गणतंत्र को लूटतंत्र में बदलने, राजनैतिक दलों को बेनकाब करने हेतु गए सप्ताह दारूलशफा में अखिल भारतीय लोकाद्दिकार संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक बैठक में विचार-विमर्श के पश्चात आठ सूत्री निर्णय लिया गया।
1.    संगठन में जो महत्वपूर्ण लोग जुड़े है या जुड़ेंगे उनकी अभिरूचि, व दक्षता, कर्मठता एवं योग्यता के आधार पर उन लोगों को पद एवं दायित्व सौंपने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री दिनेश कुमार शर्मा जी को अद्दिकृत किया गया है।
2.    संगठन के कार्यालय हेतु व्यवस्था करने के लिए राष्ट्रीय महामंत्री श्री पद्मनाथ त्रिपाठी जी को अधिकृत किया गया जो मा0 लोक निर्माण मंत्री श्री शिवपाल यादव जी से मिलकर कार्यालय को आवंटित कराने का प्रयास करेंगे। इनके साथ श्री एस0के0 जेटली जिलाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री डी0के0 शर्मा
    साथ में रहेंगे।
3.    संगठन के उद्देश्यों एवं कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार हेतु एक समिति गठित की गयी जिसमें श्री संजय मिश्रा उर्फ गुल्लू, श्री ओ0पी0 सक्सेना, श्री मुख्तार अली, श्री सच्चिदानन्द पाठक उर्फ मुन्ना को नामित किया गया।
4.    संगठन में महिला मोर्चा गठित किये जाने का भी निर्णय लिया गया जिसमंे श्रीमती रजनी गुप्ता, डाॅ0 नलिनी खन्ना एवं सुश्री हुमा परवीन आदि बैठक में उपस्थिति हुई।
5.    कृषकों को समुचित संसाधन उपलब्द्द कराये जाने आदि जैसे उत्तम बीज, शुद्ध रासायनिक खाद, कीटनाशक दवाएं, पर्याप्त जल एवं कृषि संयत्र समय पर तथा सस्ती दरों पर उपलब्द्द कराये जाने का निर्णय लिया गया।
6.    वेतन भोगी कर्मचारियों एवं पेंशनरों से आयकर न लिया जाय एवं सेवानिवृत के लाभ एक समान हांे तथा राष्ट्रीय वेतन नीति को शीघ्र बनाये जाने तथा प्रबंधतंत्र में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करायी जाय।
7.    जी0पी0ओ0 को क्रांतिकारी शहीद अशफाकउल्ला के नाम पर राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाय तथा सभी क्रांतिकारियों के इतिहास को शिलापट पर अंकित किया जाय।
8.    भ्रष्टाचार एवं अन्य मांगों के सम्बन्द्द में क्रांति दिवस 09 अगस्त, 2012 को मेरठ से दिल्ली तक की रैली तथा जंतर-मंतर पर सभा को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अगली बैठक दिल्ली/नोएडा में किये जाने का निर्णय लिया गया तथा रैली एवं सभा को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री दिनेश कुमार शर्मा को अधिकृत किया गया।